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Tuesday, September 18, 2018

सजदे किया करो

सजदे  किया करो

फिरका-परस्ती फैली है माहौल मे,

सम्हल के रहा करो ,



खंजर है हर हाथ में ,बच के चला करो।

खून की कीमत इतनी सस्ती नही होती,

क्यु खेलते हो खुनी होली ? सजदे  किया करो।



अना वालो सम्हल जाओ ,अना की कीमत बहुत होती है।

नामरहम ना करो इमान को , रूह मजलूम होती है।

नादिम हुए फिर तो, क्या नादिम हुए,

जीतो जहां  जहां को हार के ,ऐसे सिकंदर हुए तो क्या हुए।





 रूह रहेगी खाली, इमान ना रहेगा ,

मसनदे-शाही रहेगी शायद ,पर इत्मनान ना रहेगा।

8 comments:

  1. वाह !!!बहुत सुन्दर रचना। लाजवाब भाव।

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  2. अच्छी रचना...अंतिम पंक्तियाँ तो बहुत ही अच्छी लगीं.

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    1. आदरणीय धन्य्वाद सादर...

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दर्जे दसवें ब्याह हो गया

दर्जे दसवें ब्याह हो गया , खुशियाँ  धरी रही सारी।