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Monday, October 22, 2018

महफ़िल में नाम ना उछालो यूँ,

महफ़िल में नाम ना उछालो यूँ,
इंसान हूँ ,इंसान ही रहने दो। 
शोहरत अकेला कर देती,
गुमनाम हूँ ,गुमनाम ही रहने द!!

Friday, October 19, 2018

ख्वाबों की दुनिया में रहता हूँ

ख्वाबों की   दुनिया में रहता  हूँ ,
आओ तुम्हें  कुछ ख्वाब उधारी  दे  दूं |
चमक जाए चेहरे पर ख़ुशी  की लाली,
ऐसी एक खुमारी दे दूं।

Saturday, October 13, 2018

विरह की अग्नि में जलता मेरा मन


विरह की अग्नि में जलता मेरा मन
ये ना बुझी है ये ना बुझेगी।
सांसो की लड़ियाँ जो टूटी सी है
ये ना जुडी है ,ये न जुड़ेगी।

Wednesday, October 10, 2018

इश्क में देखते - देखते क्या मुकाम आया


इश्क में देखते - देखते क्या मुकाम आया ?

बैठे थे सजदे में ,और जुबां पर तेरा नाम आया।

Friday, October 5, 2018

खाली तस्वीरे

चमक बिखरी है महफिल मे,
चाँद सितारे उनके दामन मे बिखरे क्या ?
गजब अंदाज है अदाओ मे,
जन्नत से उतरे क्या ?
अजब सा दर्द है सीने मे,
सीधे दिल से गुजरे क्या ?


सौदा कर भी ले नींदो का ,बगावत ख्वाब करते है,
तजुर्बा कोई न करना ,ये तबियत नासाज़ करते है।
उड़ना है तो उड़ो ऊंचा,ये खता ख़ास करते है,
जुम्बिश करके तो देखो ,चांदनी बरसेगी झरनो से।

Monday, October 1, 2018

अजब हालात है मेरे

अजब हालात हैं मेरे के हालत बेजुबानी है।
मुस्कुराहट है चेहरे पर , तो आँखों मे क्यूँ पानी है?
रिमझिम ये जो सावन की , बरसता ये जो पानी है। 
बादल यूँ जो है ग़रजे ,ये सारी इनकी कारस्तानी है। 
धमक इनकी सुनकर अपने-आप को रोकू मैं कैसे ?
चमक बिखरे जो इनकी तो याद उसकी भी आनी है। 

जमीं क्यूँ थरथराती है, हवा मे शोर है कैसा ?
गजब क्यूँ है ये बेचैनी, अजब माहौल है कैसा ?
सांसे जम सी जाती है ,क्यूँ भरी जवानी मे?
मिलन क्यूँ नहीं होता है ,किसी भी प्रेम-कहानी मे?


हृदय को तौल बैठा हु मै दुनिया की तराजू मे,

दर्जे दसवें ब्याह हो गया

दर्जे दसवें ब्याह हो गया , खुशियाँ  धरी रही सारी।