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Monday, October 22, 2018

महफ़िल में नाम ना उछालो यूँ,

महफ़िल में नाम ना उछालो यूँ,
इंसान हूँ ,इंसान ही रहने दो। 
शोहरत अकेला कर देती,
गुमनाम हूँ ,गुमनाम ही रहने द!!

Friday, October 19, 2018

ख्वाबों की दुनिया में रहता हूँ

ख्वाबों की   दुनिया में रहता  हूँ ,
आओ तुम्हें  कुछ ख्वाब उधारी  दे  दूं |
चमक जाए चेहरे पर ख़ुशी  की लाली,
ऐसी एक खुमारी दे दूं।

Saturday, October 13, 2018

विरह की अग्नि में जलता मेरा मन


विरह की अग्नि में जलता मेरा मन
ये ना बुझी है ये ना बुझेगी।
सांसो की लड़ियाँ जो टूटी सी है
ये ना जुडी है ,ये न जुड़ेगी।

दर्जे दसवें ब्याह हो गया

दर्जे दसवें ब्याह हो गया , खुशियाँ  धरी रही सारी।